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Biaora News
ब्यावरा करीब सालभर पहले रेलवे
स्टेशन पर शुरू किए गए 98 लाख
के फुटओवर ब्रिज का उपयोग यात्री
ही नहीं कर पा रहे हैं। एफओबी
बनने के बाद भी यात्री रिस्क लेकर
ट्रैक पार करते है। वहीं, तीन
करोड़ से कायाकल्प कर देने के
बावजूद स्टेशन की हालत दयनीय
ही बनी है।
ब्यावरा स्टेशन पर रोजाना आने
वाली इंदौर-कोटा इंटरसिटी और
बीना-नागदा पैसेंजर में यात्री रोजाना
रिस्क लेकर चढ़ते हैं। आमतौर पर
रोजाना फुल रहने वाली उक्त गाड़ियों
में जगह के फेर में ट्रेन को आता देख
लोग सीधे ट्रैक पर कूद जाते हैं। ऐसे
लोग जिन्हें दूसरे नंबर प्लेटफॉर्म पर
जाना होता है वे भी ट्रैक को सीधे ही
पार करते हैं। खास बात यह है कि
इतनी सख्ती, पुलिस चेकिंग, बार-
बार निर्देशों के बावजूद ये लोग नहीं
मानते। इससे हमेशा हादसों का डर
बना रहता है। रोजानाजीआरपी टीम
द्वारा अनाउंसमेंट किया जाता है कि
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें साथ ही
आरपीएफ की टीम भी पूरी गाड़ी को
चेक करती है। बावजूद इसके
रोजाना यही हालात देखे जाते हैं।
साइड में एफओबी,
उपयोग न के बराबर
हालांकि आम तौर पर अधिकतर ट्रेनें
प्लेटफार्म क्रमांक-एक पर ही आती
हैं लेकिन कभी-कभी क्रासिंग और
मालगाड़ी लगी होने के दौरान जब
ट्रेन दो नंबर प्लेटफार्म पर आती है
तो लोग या तो ट्रेन में से होकर ट्रेन
तक पहुंचते है या फिर ट्रेन के आने
से पहले ट्रैक को सीधा क्रास करते
हैं। इसके अलावा फुट ओवरब्रिज
को रेलवे की तकनीकी टीम ने एक
ओर बना दिया जो यात्रियों की सीधी
कनेक्टिविटी में नहीं है।
प्लेटफॉर्मऔर टिकट विंधे से एक
तरफ एफओबी बन जाने से भी वह
यात्रियों के लिए उपयोगी साबित नहीं
हो पा रहा है।
-हम बार-बार अनाउंस करते हैं कि ट्रेक को सीधे पारन करें।
साथ ही एक नंबर पर यदि गाड़ी आई
है तो एक नंबर हीखड़े रहें, लेकिन
कुछ लोग सीट के फेर में रिस्क
लेकर ट्रैक पर चले जाते हैं, इसी से
खतरा बना रहता है।
पीएस मीना, स्टेशन मास्टर

