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ब्यावरा.  कहने को रेलवे तमाम प्रकार की सुविधाएं यात्रियों को देने का दावा करती है. लेकिन हकीकत में आधी भी पूरी नहीं हो पाती। बड़े शहरों को छोड़कर अन्य जगह रेलवे की सुविधाए कागजों से बाहर निकल ही नहीं पाई। ऐसे ही हालात ब्यावरा स्टेशन के हैं। कहने को यहां करीव सालभर से वाई-फाई लगा है.लेकिनबो चंद है। इससे काफी छोटा स्टेशन सिंदरिया रहा है लेकिन ज्यावरा यह सुविधा नही मिल रही है। महज प्रतीकात्मक तौर पर वाई-फाईमॉमइंस्टॉल कर रखा है. लेकिन हमेशा उसमें तकनीकि खरावी बताकर उसे बंद कर दिया जाता है। इससे वहां से रोजाना सफर करने और घंटों इंतजार करने वाले यात्रियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। यात्रियों का कहना है कि रेलवे सिर्फ दावे करता है सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिलता। इसके अलावा डिजिटल हिम्ले नहीं होने से भी यात्री भ्रमित होते हैं। स्टीन और साप्ताहिक गाड़ियां जो कि महज दो मिनट के लिए स्कती है, उनके लिए डिस्प्ले की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे यात्री समझ ही नहीं पाते कि उन्हें आखिर किस कोच में बना है। इस संबंध में यात्रियों ने डीआरएम से सीधी शिकायत और ट्वीट करने की बात कही है। बंद पड़ा एटीवीएम, टिकट खिड़की भी नहीं बढ़ाई स्टेशन पर टिकिट की मारामारी भी रोजाना हो रही है। चिकपैट मशीन खराब होजानेसेएकही खिडकीके भरोसे परी व्यवस्था हो गई है। इससे जितने भी यात्री है उन्हें पैनल रूम की खिडकी सेही शिकिट बटे जाते हैं। इससे कई बार लेन-देन में भी गड़बड़ी हो जाती है। वैकल्पिक तौर पर रेलवे के पुराने कर्मचारी के अधीनस्थ लगाई गई एटीवीएम (ऑटोमेटिक टिकिट वेडिंग मशीन) भी शो पीस बन गई है, जो किसी काम नहीं आ पा रही। बार-बार डीआरएम और रेलवे से मांग करने के बावजूद अतिरिक्त टिकिट खिड़की शुरू नहीं करवाई गई। इससे भी यात्रियों को काफी परेशानियों का वाई-फाई लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है. डिजिटल डिस्प्ले की व्यवस्था यहां नहीं है। रही बात टिकिट विडो की तो हम खुद इससे परेशान है। एकमात्र खिड़की पर टिकिट काटने में काफी परेशानी हमें उठाना पड़ती है। -मुकेश मीणा.
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