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,ब्यावरा. रेलवे द्वारा बढ़ाए गए किराये पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इनमें युवाओं, यात्रियों का कहना है कि आज भी रेलवे की चाय देशभर में मशहूर है कि कितनी बेकार क्वालिटी की मिलती है? साथ ही कैंटीन का नाश्ता, घटिया क्वालिटी का समोसा और खाने की गुणवत्ता भी किसी से नहीं छिपी है। ब्यावरा रेलवे स्टेशन के कैंटीन पर इसका उदाहरण देखा जा सकता है। ऐसे में रेलवे को पहले सुविधाएं, व्यवस्थाएं सुधारना चाहिए थीं, इसके बाद किराये पर जोर देना था। दरअसल, रेलवे ने चार पैसे किलोमीटर सुपर फास्ट ट्रेनों के एसी और स्लीपर क्लास में बढ़ाया है। साथ ही एक पैसा प्रति किलोमीटर लोकल टिकट पर बढ़ाया है। इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं है। रेलवे ने तमाम तरह की बढ़ोतरी हर बार की है लेकिन सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया। ट्रेनों का टाइम टेबल नहीं सुधर पाया और स्वच्छता को लेकर भी ट्विटर पर शिकायतें आम है। रेलवे कर्मचारियों के व्यवहार के साथ ही रिजर्वेशन, रिफंड, कैसिलेशन इत्यादि में परेशानियां कम नहीं हुई हैं। इसी कारण रेलवे को पहले जनता की परेशानियों को समझना चाहिए था। -आम आदमी की जेब पर सीधा भार बढ़ा दिया है। लोकल और पैसेंजर ट्रेनों में भी एक प्रतिशत किराया बढ़ाया गया है जो कि डीआर यादव, रिटायर्ड शिक्षक,ब्यावरा रेलवे को किराया बढ़ाने से पहले यात्रियों की सुविधाओं पर जोर देना था। हर बार किराया तो बढ़ाया जाता है लेकिन सेकंड क्लास के यात्रियों को अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिल पाती। सचिन श्रीवास्तव, एडवोकेट, ब्यावरा
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