ब्यावरा. कदम-कदम पर छली जाने वाली शहर की जनता का अब प्रशासनिक तंत्र और नेताओं से भरोसा ही उठ गया है। शहर के एकमात्र और व्यस्ततम सिविल अस्पताल रोड के गड्ढे और धूल लोगों के लिए परेशानियों का कारण बने हुए हैं। इसके लिए प्रस्तावित रोड अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
____ दरअसल, अस्पताल रोड को लेकर हो रही नपा की नौटंकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है
कि बीते पांच साल में तीन बार टेंडर हो जाने के बावजूद महज डेढ़ किलोमीटर का रोड बन नहीं पाया है। बारिश से पहले मनमाने ढंग से किए जा रहे काम को लेकर नगरीय
प्रशासन ने गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बाद बारिश में काम थम गया। नपा ने ध्यान नहीं दिया। अब एक पट्टी का कुछ मीटर का काम करने के बाद फिर से रोड के काम की रफ्तार धीमी हो गई है, इससे परेशानियों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है।
____ दरअसल, अस्पताल रोड को लेकर हो रही नपा की नौटंकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है
कि बीते पांच साल में तीन बार टेंडर हो जाने के बावजूद महज डेढ़ किलोमीटर का रोड बन नहीं पाया है। बारिश से पहले मनमाने ढंग से किए जा रहे काम को लेकर नगरीय
प्रशासन ने गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बाद बारिश में काम थम गया। नपा ने ध्यान नहीं दिया। अब एक पट्टी का कुछ मीटर का काम करने के बाद फिर से रोड के काम की रफ्तार धीमी हो गई है, इससे परेशानियों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है।
पूरे रोड पर जगह-जगह गड्ढे हैं,धूल के गुबार ने लोगों को बीमार कर दिया है। बता दें कि उक्त रोड से बड़ी संख्या में मरीजों का आना-जाना होता है और तमाम अधिकारी, नेता यहीं से आते-जाते हैं, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। रात में अंधेरा, पुलिया पर रैलिंग भी नहीं,हर पल हादसे का खतरा रहता है। प्रशासन को इसकी और ध्यान देना चाहिए।

