Raigarh# पिछले करीब एक हफ्ते से जिले में चल रहे शुष्क मौसम, कोहरे और बादलों की लुकाछिपी के बाद सोमवार-मंगलवार के बीच कई जगह कहीं तेज तो कहीं धीमी बारिश ने जहां किसानों के चेहरे खिला दिया वहीं लोगों को दिन में भी कंपकपाने मजबूर कर दिया। सोमवार मध्य रात्रि से मंगलवार सुबह तक राजगढ़, ब्यावरा, सारंगपुर, जीरापुर, खिलचीपुर, बखेड़, करेड़ी, पाटक्या आदि स्थानों पर हुई बारिश के बाद मंगलवार को नरसिंहगढ़ सहित पूरे दिन जिलेभर में बादल छाए रहे। राजगढ़ में रात करीब साढ़े तीन बजे से चार बजे तक तेज बारिश ने शहर को भिगो दिया। ऐसे में पिछले दो दिन से सर्दी से मिली राहत मंगलवार को एक बार फिर बढ़ गई। सर्दी से दिनभर लोग गर्म कपड़ों में लिपटे और अलाव के सहारे खुद को गर्म रखने का प्रयास करते नजर आए। हालांकि बिन मौसम हुई यह बरसात रबी फसलों खासकर गेहूं के लिए लाभदायक है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव की मानें तो चार हफ्ते पूर्व हुई गेहूं की बोवनी के बाद अब फसलों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई की आवश्यकता है। जिसकी कमी बारिश ने पूरी की है। वहीं इस बारिश के बाद फसलों पर पड़ने वाले पाले की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। यदि दो चार दिन और बारिश होती है तो फसलों को कोई नुकसान नहीं है बस साथ ओलावृष्टि न हो।
Raigarh# पिछले करीब एक हफ्ते से जिले में चल रहे शुष्क मौसम, कोहरे और बादलों की लुकाछिपी के बाद सोमवार-मंगलवार के बीच कई जगह कहीं तेज तो कहीं धीमी बारिश ने जहां किसानों के चेहरे खिला दिया वहीं लोगों को दिन में भी कंपकपाने मजबूर कर दिया। सोमवार मध्य रात्रि से मंगलवार सुबह तक राजगढ़, ब्यावरा, सारंगपुर, जीरापुर, खिलचीपुर, बखेड़, करेड़ी, पाटक्या आदि स्थानों पर हुई बारिश के बाद मंगलवार को नरसिंहगढ़ सहित पूरे दिन जिलेभर में बादल छाए रहे। राजगढ़ में रात करीब साढ़े तीन बजे से चार बजे तक तेज बारिश ने शहर को भिगो दिया। ऐसे में पिछले दो दिन से सर्दी से मिली राहत मंगलवार को एक बार फिर बढ़ गई। सर्दी से दिनभर लोग गर्म कपड़ों में लिपटे और अलाव के सहारे खुद को गर्म रखने का प्रयास करते नजर आए। हालांकि बिन मौसम हुई यह बरसात रबी फसलों खासकर गेहूं के लिए लाभदायक है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव की मानें तो चार हफ्ते पूर्व हुई गेहूं की बोवनी के बाद अब फसलों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई की आवश्यकता है। जिसकी कमी बारिश ने पूरी की है। वहीं इस बारिश के बाद फसलों पर पड़ने वाले पाले की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। यदि दो चार दिन और बारिश होती है तो फसलों को कोई नुकसान नहीं है बस साथ ओलावृष्टि न हो।

