ब्यावरा .जिले के लिए महत्व
प्रोजेर रामगंजमही-भोपाल रेलाई
लाइन अभीभीकागजों में उलझी है
राजस्थान में करीब तीन साल पहर
से टेने दौडने लगी है और मार्क
सोग में एकटक रेलवे के
निर्माणको नहीं लग पाई।
संसद रोहमारनगर कारावा
कि 2022 तक जिले में ट्रेन दौड़ने
लगेगी, लेकिन हकीकत में वर्ष
2001ो आज दिनांककउक
रेलवे लाइन के लिए जमीन
अलॉट नहीं होचाव-2001
भूमिपूजन होने के बाद या स्पर
कर दिया गयावा किसीहोर भोपर
और राजगह जितेकी कितन
जमीन उक्त लान के लिए काम
आएगी, बावजूद इसके कागजें मेंह
पूरा प्रोजेक्ट उलझा हुआ है
राजस्थान सीमा से राजगढ़ की ओर
करीब दो साल से वर्कशाहो।
का तार किया जा रहा है। वहीं
भोपाल की ओर से बैरागढ़ से में
काम शुरू नहीं हुमा इससे पूर
प्रोजेक्ट डेबाते में है।
कमिश्नर केजमीन
अलॉटमेंट के निर्देश
रामगंजमंडी लाइन का अभी तक का सफर
2001 में पायात का भूमिपूजना
2003 तापरिवर्तन गरजेक्टसया।
2008 सविआई लेकिन उपयोग नहीं हो पाया।
2011 जवान सकारवर करवाया
2013 4200 मानवी
2015 में 200
नमून-पसके।
2017 में 200 करोड़ मिले लेकिन काटकरके तिरसी।
2018 भूमि अभियान में उतारा प्रोजेक्ट
20194 रित डन्ही 7 किलोमीटर लंबी है पूरी लाइन
मप्र की सीमा में ही
दिक्कत,राजस्थान में
बचा काम भी जोरों पर
उक्त प्रोजेक्टकोदो हिस्सों में
बारा गया है. इसमें एक हिस्सा
भोपाल-से खेटा तक है और
दूसरा कोटा से खावय। इसमें
धर्मल पावर सेलायतक
टेलदैजनेतीऔरझलनाड
कीमतोमरसीमा कोई
कम अभीतक शुरूही नहीं हो
डीआरएमबदल गए.दोबार
सांसद बाल गए लेकिन इस
नहीं मिल पाई।
कई पहले रेलवे की ओर से ही
अरकी रही, लेकिन राजस्व विभाग
ने भी इसे गभीरता से नहीं लिया।
वर्तमान में भीाजव्यवरा के सात
गा का मामला साफ हुआ है।.
मध्यप्रदेश की सीमा में जमीनों में उलझा प्रोजेक्ट | राजस्थान में चलने लगी ट्रेन, मप्र में 2001 से नहीं मिली जमीन, 2022 में कैसे होगा काम पूरा (Biaora News)
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