राजगढ जिला पंचायत के सभाकक्ष में रविवार सुबह नौ बजे से बाल संरक्षण आयोगकै राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजदगी में एक बैठक और कार्यशाला का आयोजन रखा गया है.जिसमें ऐसेबच्चे जिन्हें शासकीय योजनाओं और जेजे एक्ट के तहत मिलने वाली सुविधाओं की आवश्यकता है, उस पर चर्चा की जाएगी। साथ ही स्कूल,महिलाबाल विकास और स्वास्थ्य से जुड़े बच्चों केम पर भी बात होगी। आयोग की आठ सदस्य टीम जिले में दो दिन पहले ही पहुंच गई और अलग-अलग जगह का निरीक्षण टीम के माध्यम से किया जा रहा है। जिसमें शनिवार को जहां नरसिंहगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्र में सदस्य रंजनीकांत यादव और शाइस्ता केशाह रानिरीक्षण किया गया। वहीं रविवार को सुबह से ही जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पताल मेंटीम पहुंची और उन्होंने एसएनसीयू निरीक्षण किया। यहां एसएनसीयू वार्ड में एकहीरेटिटवार्मर पर दो से तीन बच्चे देव अचभित रह गए। दीवारों पर फगस जमी हुई थी। जो प्रसूति वार्ड के पास एसएलसीयू होना चाहिए वह करीब 500 मीटर दूर मिला। ऐसे में जो महिलाएं बच्चे को बालिका छात्रावास में नहीं थी साफ-सफाई टीम अस्पताल के बाद बालिका छात्रावास पहुंचे। यहां उन्होंने छात्रावास में व्यवस्थाओं को लेकर काफीनाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहानतो छात्रावास में साफ । सफाई मिली और न ही बच्चों को दिए जाने वाली सुविधाएं वहां पर थी। उन्होंने कुछ ऐसे मुद्दों पर भी बात कीजोबालिका पत्रावास में बहत ही जरूरी होती है। लेकिन वह सामग्री छात्रावास में नहीं मिलने से उन्होंने मौजूद स्टाफ को फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा जिस तरह का टॉयलेट छात्रावास में था। यदि वहां न भी होता तो ज्यादा अच्छा होता। इतनी गंदगी कहीं नहीं देखी। फीडिंग कराने के लिए पहुंचती है। उन्हें परेशानी होती है। एसएनसीयू वार्ड के पास कोई टॉयलेट भी नहीं है, जिसको लेकर आयोग की टीम ने नाराजगी व्यक्त की और इस मामले को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहंचाने की बात कही। यहां उन्होंने जब मेटरनिटी वार्ड का निरीक्षण किया तो वहां भी कोई महिला चिकित्सक नहीं मिली। दो निजी अस्पतालों के निरीक्षण में कई कमियां मिली। उन्होंने कहा कि इन्हें संचालन की मान्यता कैसे मिल रही।
राजगढ जिला पंचायत के सभाकक्ष में रविवार सुबह नौ बजे से बाल संरक्षण आयोगकै राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजदगी में एक बैठक और कार्यशाला का आयोजन रखा गया है.जिसमें ऐसेबच्चे जिन्हें शासकीय योजनाओं और जेजे एक्ट के तहत मिलने वाली सुविधाओं की आवश्यकता है, उस पर चर्चा की जाएगी। साथ ही स्कूल,महिलाबाल विकास और स्वास्थ्य से जुड़े बच्चों केम पर भी बात होगी। आयोग की आठ सदस्य टीम जिले में दो दिन पहले ही पहुंच गई और अलग-अलग जगह का निरीक्षण टीम के माध्यम से किया जा रहा है। जिसमें शनिवार को जहां नरसिंहगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्र में सदस्य रंजनीकांत यादव और शाइस्ता केशाह रानिरीक्षण किया गया। वहीं रविवार को सुबह से ही जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पताल मेंटीम पहुंची और उन्होंने एसएनसीयू निरीक्षण किया। यहां एसएनसीयू वार्ड में एकहीरेटिटवार्मर पर दो से तीन बच्चे देव अचभित रह गए। दीवारों पर फगस जमी हुई थी। जो प्रसूति वार्ड के पास एसएलसीयू होना चाहिए वह करीब 500 मीटर दूर मिला। ऐसे में जो महिलाएं बच्चे को बालिका छात्रावास में नहीं थी साफ-सफाई टीम अस्पताल के बाद बालिका छात्रावास पहुंचे। यहां उन्होंने छात्रावास में व्यवस्थाओं को लेकर काफीनाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहानतो छात्रावास में साफ । सफाई मिली और न ही बच्चों को दिए जाने वाली सुविधाएं वहां पर थी। उन्होंने कुछ ऐसे मुद्दों पर भी बात कीजोबालिका पत्रावास में बहत ही जरूरी होती है। लेकिन वह सामग्री छात्रावास में नहीं मिलने से उन्होंने मौजूद स्टाफ को फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा जिस तरह का टॉयलेट छात्रावास में था। यदि वहां न भी होता तो ज्यादा अच्छा होता। इतनी गंदगी कहीं नहीं देखी। फीडिंग कराने के लिए पहुंचती है। उन्हें परेशानी होती है। एसएनसीयू वार्ड के पास कोई टॉयलेट भी नहीं है, जिसको लेकर आयोग की टीम ने नाराजगी व्यक्त की और इस मामले को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहंचाने की बात कही। यहां उन्होंने जब मेटरनिटी वार्ड का निरीक्षण किया तो वहां भी कोई महिला चिकित्सक नहीं मिली। दो निजी अस्पतालों के निरीक्षण में कई कमियां मिली। उन्होंने कहा कि इन्हें संचालन की मान्यता कैसे मिल रही।

