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जिले के बांध और तालाब लबालब

राजगढ़. पिछले साल की तुलना में जिले में इस बार जमकर बादल बरस रहे हैं। हालात यह है कि इस समय पिछले साल कहीं भी डैम के गेट नहीं खोले गए थे। जबकि इस बार ऐसा कई बार हो चुका है और जिले की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से सभी के गेट खोलने पड़े। पिछले साल इस अवधि में जिले में 529.05 बारिश हुई थी। जो इस साल 925.2 पर पहुंच गई। जबकि जिलेकी औसत बारिश की यदिबात करें तो 1107 है। जबकि मावठा से लेकर इस सीजन की पूरी बारिश शामिल होती है। इस तरह से अभी बारिश हो रही है। उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल औसत बारिश का आंकड़ा पार हो सकता है। पिछले 24 घंटे में 40.9 मिमी बारिश जिलेभर में हुई है। जिले में मोहनपरा और कंडालिया दो ऐसी बड़ी सिंचाई परियोजना है। इसमें 400 और 398 मीटर पानी का लेबल है और लक्ष्य के अनुसार अब इनमें मुश्किल से एक और दो मीटर पानी भरना शेष है। जबकि पिछले दिनों हुई बारिश में यह 395-96 तक पहुंच चुका है। जिले के बड़े डैमों की स्थिति मोहनपुरा- मोहनपुरा सिंचाई परियोजना 398 एमसीएम पानी का लेबल है। इसे इस साल 393 तक भरा जाना है। लेकिन पानी की आवक बनी होने से अभी इसे 391 एमसीएम तक खाली रखा है। 15 अगस्त को डैम के 12 गेट खोले गए थे। जो दो दिन तक खुले रहे। इससे पहले आठ गेट खोले गए थे। कुंडालिया- कुंडालिया डैम की भराव क्षमता 400 एमसीएम है। जबकि यह 392 एमसीएम भर चुका है। चार दिन तक। गेट और पहले दो गेट खोले गए थे। कंवर चैनसिंह बांध-नरसिंहगढ़ में सबसे पुराने डेमों में से एक कुंवर चैनसिंह बांध में 26.66 एमसीएम पानी आता है। यह फुल भरा हुआ है। दो साल में पहली बार नौ में से छह गेट खोले गए। कुशलपुरा- ब्यावरा में स्थित कुशलपुरा डैम की क्षमता 14 एमसीएम है। वर्तमान में सभी गेट बंद हैं, लेकिन पिछले दिनों पांच गेट खोले गए थे, जो शुक्रवार को बंद -इस बार अच्छी बारिश होने से Vलगभग सभी डैम और बैराज फुल हो चुके हैं। पानी की आवक बनी हुई है। इसलिए बीच बीच में गेट या वेस्टवेयर को खोलकर पानी निकाला जाता रहा है। अभी भी पानी की आवक बनी हुई है। यह जिले के लिए अच्छी खबर है। केके खरे, ईई मोहनपुरा सिंचाई परियोजना राजगढ़ 
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