क्षेत्र में पिछले 20 दिनों से बारिश हो रही है। इस दौरान बादल छाने और नमी के कारण सोयाबीन फसल पर इल्ली का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इस दौरान कीट से बचाने किसानों ने कीटनाशक दवा का छिड़काव भी किया, लेकिन बार-बार बारिश के चलते यह दवाएं भी बेअसर रही है। अब इल्ली सोयाबीन के फल व फूल को खाने के बाद पौधे को भी नष्ट करने लगी है। वहीं पोध के पत्ते भी पीले पड़ने लगे हैं। किसानों के अनुसार इस समय तीन तरह की इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है। ये सेमी लूपर, तंबाखू इल्ली और गर्डर बीटल हैं। इसके साथ ही लाल रंग का उड़ने वाला कीड़ा भी देखने को मिल रहा है। समय रहते दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया तो इल्लियां काफी नुकसान पहुंचा देंगी। लगातार बारिश से पीले पड़ने लगे पौधेः बरगोलिया के किसान कन्हैयालाल सिंगला, चौसल के देवी सिंह, इंदाहेड़ी के प्रेमनारायण दांगी, करेड़ी के बबलू पटेल ने बताया कि उन खेतों में अधिक नुकसान हुआ है जो निचली जगहों पर हैं। निकासी की व्यवस्था नहीं होने से पौधों के आसपास लगातार पानी जमा रहा। इस कारण से इनकी ग्रोथ रुक गई और अब ये पीले पड़ने लगे हैं। सफेद मक्खी से बचाव के लिए ऐसे करें छिड़कावः सोयाबीन सहित सब्जियों में इस समय सफेद मक्खी का प्रकोप बना हुआ है। यह मक्खी फसल पर विषाणू जनित पीला मोजेक रोग फैलाती है। रोग के लक्षण पौधे के पत्ते पर दिखाई देते हैं। नियंत्रण सलाहः क्वीनालफॉस और इंडोक्साकार्ब के घोल के छिड़काव से मरेगी इल्ली कृषि वैज्ञानिक डॉ अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि फसलें में लगी इल्ली से नियंत्रण के लिए छोटी अवस्था में क्वीनालफॉस 25 ईसी 15 सौ मिली या मियोमिल 40 एसपी एक हजार ग्राम प्रति हेक्टेयर छह सौ लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यदि इल्लियां बड़ी अवस्था में हैं तो इंडोक्सकावं 14.5 एसपी 500 मिली दवा चिपकने वाले पदार्थ के साथ मिलाकर छिड़काव करें। के लिए मौसम साफ होते ही थायोमियोक्सम 25 डब्ल्यूजी 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर वा इथोफेनाक्स 10 ईसी 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर या एसिटामग्रीड 20 एसपी ढाई सी ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़कें।
क्षेत्र में पिछले 20 दिनों से बारिश हो रही है। इस दौरान बादल छाने और नमी के कारण सोयाबीन फसल पर इल्ली का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इस दौरान कीट से बचाने किसानों ने कीटनाशक दवा का छिड़काव भी किया, लेकिन बार-बार बारिश के चलते यह दवाएं भी बेअसर रही है। अब इल्ली सोयाबीन के फल व फूल को खाने के बाद पौधे को भी नष्ट करने लगी है। वहीं पोध के पत्ते भी पीले पड़ने लगे हैं। किसानों के अनुसार इस समय तीन तरह की इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है। ये सेमी लूपर, तंबाखू इल्ली और गर्डर बीटल हैं। इसके साथ ही लाल रंग का उड़ने वाला कीड़ा भी देखने को मिल रहा है। समय रहते दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया तो इल्लियां काफी नुकसान पहुंचा देंगी। लगातार बारिश से पीले पड़ने लगे पौधेः बरगोलिया के किसान कन्हैयालाल सिंगला, चौसल के देवी सिंह, इंदाहेड़ी के प्रेमनारायण दांगी, करेड़ी के बबलू पटेल ने बताया कि उन खेतों में अधिक नुकसान हुआ है जो निचली जगहों पर हैं। निकासी की व्यवस्था नहीं होने से पौधों के आसपास लगातार पानी जमा रहा। इस कारण से इनकी ग्रोथ रुक गई और अब ये पीले पड़ने लगे हैं। सफेद मक्खी से बचाव के लिए ऐसे करें छिड़कावः सोयाबीन सहित सब्जियों में इस समय सफेद मक्खी का प्रकोप बना हुआ है। यह मक्खी फसल पर विषाणू जनित पीला मोजेक रोग फैलाती है। रोग के लक्षण पौधे के पत्ते पर दिखाई देते हैं। नियंत्रण सलाहः क्वीनालफॉस और इंडोक्साकार्ब के घोल के छिड़काव से मरेगी इल्ली कृषि वैज्ञानिक डॉ अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि फसलें में लगी इल्ली से नियंत्रण के लिए छोटी अवस्था में क्वीनालफॉस 25 ईसी 15 सौ मिली या मियोमिल 40 एसपी एक हजार ग्राम प्रति हेक्टेयर छह सौ लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यदि इल्लियां बड़ी अवस्था में हैं तो इंडोक्सकावं 14.5 एसपी 500 मिली दवा चिपकने वाले पदार्थ के साथ मिलाकर छिड़काव करें। के लिए मौसम साफ होते ही थायोमियोक्सम 25 डब्ल्यूजी 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर वा इथोफेनाक्स 10 ईसी 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर या एसिटामग्रीड 20 एसपी ढाई सी ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़कें।

