लगातार बिगड़ती व्यवस्था को देखते । हुए पिछले दिनों स्थानीय विधायक बापू सिंह तंवर जिला चिकित्सालय एक मरीज को देखने पहुंचे थे। वहां एक्सरे न होने की शिकायत के बाद वे आगबबूला हुए और उन्होंने अस्पताल में ताला तक डालने की चेतावनी दी थी। उनकी चेतावनी के बाद एक्सरे मशीन तो सुधर गई, | लेकिन जिला चिकित्सालय में । प्रसूताओं को रैफर करने का | सिलसिला बढ़ गया। । ओपीडी लगभग इमरजेंसी तक । सीमित रह गई। चिकित्सक अपने । चैवर में नहीं मिलते, हालाकि इस अवस्था को लेकर प्रबंधन डॉक्टरों । की कमी बताता है। यह ठीक भी है। लेकिन लगातार इस तरह की । अव्यवस्थाओं से मरीजों की परेशानी । बढ़ती जा रही है। कुछ इसी तरह का । मामला नरसिंगढ़ के भैसाना गांव में । भी सामने आया था। इसमें न कोई । दवा वितरण करने वाला था और न ही डॉक्टर या फिर एएनएम। इसको | लेकर जिला पंचायत सदस्य गोविंद गुर्जर ने अस्पताल में ताला लगाकर चाबी सीएमएचओ केके श्रीवास्तव को सौंप दी। जब अस्पताल खुलता ही नहीं और कोई कर्मचारी नहीं आता तो, वहां ताला लगना ही उचित रहेगा। इसके बाद वहां पर एक चिकित्सक और एएनएम की व्यवस्था कर दी गई। अब वहां दो दिन से अस्पताल खुल रहा है। गंभीर बताकर रैफर बाद में दूसरे अस्पतालों में नार्मल डिलेवरी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लगातार प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। इसे स्टाफ की कमी कहा जाए या फिर व्यवस्थाओं की कमी, जो । डॉक्टर हैं वह इलाज करने में । आनाकानी करने लगे हैं। खासकर जिला चिकित्सालय के मेटरनिटी वार्ड जहां आए दिन शिकायतों का दौर चलता रहता है। यहां स्टाफ हो या फिर डॉक्टर राजगढ़ में प्रसव कराने की जगह रेफर करने पर ज्यादा विश्वास रखते हैं। रेफर करने की लापरवाही उस समय स्पष्ट हो जाती है जब किसी भी प्रसूता को
लगातार बिगड़ती व्यवस्था को देखते । हुए पिछले दिनों स्थानीय विधायक बापू सिंह तंवर जिला चिकित्सालय एक मरीज को देखने पहुंचे थे। वहां एक्सरे न होने की शिकायत के बाद वे आगबबूला हुए और उन्होंने अस्पताल में ताला तक डालने की चेतावनी दी थी। उनकी चेतावनी के बाद एक्सरे मशीन तो सुधर गई, | लेकिन जिला चिकित्सालय में । प्रसूताओं को रैफर करने का | सिलसिला बढ़ गया। । ओपीडी लगभग इमरजेंसी तक । सीमित रह गई। चिकित्सक अपने । चैवर में नहीं मिलते, हालाकि इस अवस्था को लेकर प्रबंधन डॉक्टरों । की कमी बताता है। यह ठीक भी है। लेकिन लगातार इस तरह की । अव्यवस्थाओं से मरीजों की परेशानी । बढ़ती जा रही है। कुछ इसी तरह का । मामला नरसिंगढ़ के भैसाना गांव में । भी सामने आया था। इसमें न कोई । दवा वितरण करने वाला था और न ही डॉक्टर या फिर एएनएम। इसको | लेकर जिला पंचायत सदस्य गोविंद गुर्जर ने अस्पताल में ताला लगाकर चाबी सीएमएचओ केके श्रीवास्तव को सौंप दी। जब अस्पताल खुलता ही नहीं और कोई कर्मचारी नहीं आता तो, वहां ताला लगना ही उचित रहेगा। इसके बाद वहां पर एक चिकित्सक और एएनएम की व्यवस्था कर दी गई। अब वहां दो दिन से अस्पताल खुल रहा है। गंभीर बताकर रैफर बाद में दूसरे अस्पतालों में नार्मल डिलेवरी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लगातार प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। इसे स्टाफ की कमी कहा जाए या फिर व्यवस्थाओं की कमी, जो । डॉक्टर हैं वह इलाज करने में । आनाकानी करने लगे हैं। खासकर जिला चिकित्सालय के मेटरनिटी वार्ड जहां आए दिन शिकायतों का दौर चलता रहता है। यहां स्टाफ हो या फिर डॉक्टर राजगढ़ में प्रसव कराने की जगह रेफर करने पर ज्यादा विश्वास रखते हैं। रेफर करने की लापरवाही उस समय स्पष्ट हो जाती है जब किसी भी प्रसूता को

