
राजगढ़. हुसैन की शाहदत और सम्मान के स्वरूप में मनाए जाने वाले मोहर्रम के त्योहार में अब सिर्फ चंद दिन का समय और शेष बचा है।ऐसे में मोहर्रम के नजदीक आते ही इस पर्व पर विशेष रूप से बनने वाले ताजियों के निर्माण की तैयारी भी शुरू हो गई है। शहर में राजसी काल से ताजिये बनाने की परंपरा है। स्टेट टाइम में तो उस समय केशासकों द्वारा अपनी ओर से एक ताजिये का निर्माण करवाया जाता है। अब ताजिये के निर्माण के लिए स्टेट से मिलने वाली सहायता भले ही बंद हो गई है। लेकिन राजगढ़ स्टेट की ओर से बनने वाले ताजिये की परंपरा अब भी जारी है।माताजी की गली स्थित इमामबाडे में हर साल ताजिया का निर्माण करने वाले कलाकार इरशाद खान ने बताया कि ताजिये बनाने की शुरुआत परंपरा अनुसार बकरीद सेकी जाती है। ऐसे में सोमवार शाम से ताजिया निर्माण की विधिवत शुरुआत की गई। इरशाद ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी यहां बनने वाला ताजिया विशेष संदेश देने वाला होगा। ___ इस बार बनने वाले ताजियों का निर्माण इरानी कला से करते हुए उसे तिरंगे का स्वरूप दिया जाएगा। राष्ट्रध्वज के तीनों रंग को मिलाकर बनने वाले इस ताजिये का निर्माण लोगों में देशप्रेम, एकता और सौहार्द्र के संदेश के लिए किया जा रहा है। ताजिये के निर्माण में करीब पन्द्रह दिन का समय लगेगा। जबकि इसके निर्माण करीब 50 हजार रुपए का खर्च आने का अनुमान लगाया गया है।