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ब्यावरा यात्रियों की सहुलियत के लिए रेलवे स्टेशन पर प्रतिस्पर्धा के तहत शुरू किया गया नया कैटीन महीनेभर भी नहीं चल पाया। खान-पान टी-स्टॉल इन दिनों बंद हो गया है। वहीं, एकनंबर पर बनेटी स्टॉल पर भी ऐसी चीजें मिलती है जो खाने योग्य नहीं है। समोसा तो ऐसा होता है जैसे पूरा पका हीन हो। बावजूद इसके रेलवे इस ओर ध्यान नहीं दे रही। देश के सबसे बड़े परिवहन विभाग भारतीय रेल्वे में तमाम सेवाएं भगवानभरोसे ही चल रही है। चाहे निर्माण कार्यों की बात हो या रेलवे से जुड़े अन्य काम की सभी में रेलवे का काम भगवान भरोसे ही है। यात्रियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ करते हुए मौजूदा कैटीन वाले भी घटिया क्वालिटी का नाश्ता रेलवे की तय दरों में बेचते हैं। साथ ही कैटीन के कर्मचारी आधे समय भी ड्रेस में नहीं रहते। न तमाम बातों के साथ ही न नाश्ते की क्वालिटी में दम है न ही भी अपनी पीड़ा बयां की है। उनका कहना है कि जो रेट रेलवे मुहैया करवाती है उसमें खर्च भी नहीं निकल पाता, इसीलिए हमें क्वालिटी से समझौता करना पड़ता है। वहीं, समय-समय पर आने वाले रेलवे के बड़े अधिकारियों का नाश्ता भी फ्री ही जाता है, ऐसे में खर्च वहां भी पूरा नहीं पड़ पाता। हालांकि कैंटीन वाले ने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन अपनी पीड़ा इसी बात को लेकर बयां की है कि रेलवे अगर पर्याप्त पैसा दे तो हम बेहतर क्वालिटी का नाश्ता मुहैया करवा सकते हैं। 
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