पुराने टेंडर के तहत हुए काम में ही उपयोग किया जाएगा सीसी, बाकी पूरा रोड डामर से ही बनेगा
ब्यावरा. पहले डामर से सीसी को
अनिवार्य करने के बाद केंद्रीय भूतल ।
विभाग ने फिर से अब नए प्रोजेक्ट
डामर से बनाने की योजना बनाई है।।
बीच में इसमें भी फेरबदल कर दिया।
गया था लेकिन हाल ही में।
एनएचएआई को निर्देश मिले हैं कि
जितने भी मौजूदा (ऑनगोइंग)
प्रोजेक्ट हैं, उनमें भी डामर का ही
उपयोग करें।
दरअसल, सीसी वाले ईपीसी
(इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट
कंस्ट्रक्शन) मोड के प्रोजेक्ट्स में
लगातार आ रही शिकायतों, ।
क्वालिटी में आ रही दिक्कतों के :
साथ ही अन्य परेशानी के बाद इसमें
बदलाव किया गया है। साथ ही एक
प्रमुख दिक्कत पानी और नर्मदा सेंट
को लेकर आ रही थी, इसी दिक्कत
के कारण देवास-ब्यावरा फोरलेन
इतना लंबित हुआ है। करीब
सालभर बाद भी इसे रफ्तार नहीं
मिल पाई है। पहले भोपाल-ब्यावरा
फोरलेन को लेकर भी कयास
लगाए जा रहे थे कि आधा हिस्सा
सीसी और आधा डामर से बनेगा,
लेकिन एनएचएआई ने अब निर्देश
जारी किए हैं कि सिर्फ पुराना बचा
हुआ रिनोवेट किया जाने वाला
हिस्सा ही सीसी से बनेगा, बाकी
जितना भी रोड बचा हुआ है उतना
डामरयुक्त होगा।
निर्माण की क्वालिटी
पर अभी भी सवाल?
पुराने रोड पर ही नई लेयर बना देने
और साइड ढंग से नहीं भरने को
लेकर तमाम प्रकार के सवाल अभी
भी खड़े हो रहे हैं जिस पर न
एनएचएआई जवाब दे पाई है ना ही
निर्माण एजेंसी। निर्माण एजेंसी
सीडीएस की हकीकत हाल ही में
भोपाल मुबारकपुर जंक्शन सेलाल
घाटी के बीच नजर आई। यहां बने
सीसी रोड से नुकसान
-रोड में सुविधाजनक नहीं होता।
-वाहनों के पहिये खराब होते हैं।
. सीसी रोड में पानी नहीं
सोखता, जिसके कारण वाटर
लेवल नहीं बढ़ पाता है।
. मेंटेनेंस में भी दिक्कत।
जो काम कर रहे हैं उसे पूरा
किया जाएगा, जहां गुणवत्ता
की बात है तो हमारा ध्यान सुधार
की ओर है। हमें उक्त रोड कादी-
टेंडर मिला है, जिसमें पहले की
एजेंसी ने जो काम छोड़ा उसे भी
हम निपटा रहे हैं।
-एसएस झा, प्रोजेक्ट मैनेजर,
सीडीएस, प्रालि, भोपाल-व्यावरा
प्रोजेक्ट

